जवाब की राह ताकता सती का सवाल

>> सोमवार, १३ अक्तूबर २००८

जवाब की राह ताकता सती का सवाल
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सती की गति न जाने कोय
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कई ऐसे उदाहरण देखने को मिलते है कि औरत को जबर्दस्ती सती कराया गया। लेकिन आज की सती महिलाओं को किसने सती करवाया। यह सवाल कब तक जवाब की राह देखता रहेगा। हम सबको मिलकर इसका जवाब जल्द से जल्द खोजना पड़ेगा। वर्ना जाने और कितनी महिलाएं सती हो जाएंगी।
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फिर एक औरत सती हो गई। इधर के कुछ सालों का इतिहास खंगालें तो यह कोई पांचवी-छठी घटना होगी।

दूसरी अन्य समस्याओं की तरह अगर हम यह मानकर चलने लगे कि सती प्रथा के रोकथाम की कोई भी कोशिश कामयाब नहीं होगी, तो फिर नहीं ही होगीं। इसलिए हमें पाजिटीव ही सोचना होगा।

अब हमें इस बात पर विचार करना चाहिए कि ... क्या कारण है जो आज भी सती जैसी घटनाएं हो रही है। घटनाओं पर नजर डालें तो सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि सभी घटनाएं अनपढ़, अशिक्षित और निम्न वर्ग के बीच घट रही है। यानी ऐसी जगह जहां जागरूकता की कमी है। महिलाओं में आज भी पति को परमेश्वर और सर्वस्व मानने की प्रथा है। पति केसाथ ही मरना उन्हें अपना प्रथम कर्तव्य जान पड़ता है। उन महिलाओं को सती होने में आत्महत्या जैसा बोध भी नहीं होता। क्योंकि आत्महत्या करने वाला किसी न किसी परेशानी और मजबूरी केचलते करता है। यानी जीवन से हार कर। मगर इन महिलाओं ने सती होने का फैसला अपनी खुशी से लिया।

यह बात समझ से परे है कि आखिर कैसे सती हुई महिलाओं के मन में यह बात बैठ जाती है कि उन्हें पति के साथ सती होना है। इतिहास में झांके तो पता चलता है कि पहले महिलाओं ने पति के नहीं रहने के बाद दुश्मन सेनाओं के कहर, अपमान से बचने के लिए जौहर होना या सती होना शुरू किया। लेकिन बाद में महिलाओं को पति की मौत के बाद सती होने के लिए मजबूर किया जाने लगा।

कई ऐसे उदाहरण देखने को मिलते है कि औरत को जबर्दस्ती सती कराया गया। लेकिन आज की सती महिलाओं को किसने सती करवाया। यह सवाल कब तक जवाब की राह देखता रहेगा। हम सबको मिलकर इसका जवाब जल्द से जल्द खोजना पड़ेगा। वर्ना जाने और कितनी महिलाएं सती हो जाएंगी।


http://www.bhaskar.com/2008/10/13/0810131125_lalmati_pious.html

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