
रोज की तरह आज भी अखबार देख रहा था ।
अचानक एक ख़बर पर नज़र गई ।प्रभा खेतान नहीं रहीं ... ये क्या पीली आंधी, छिन्नमस्ता , सिमोन द बोउवा की पुस्तक ‘दि सेकेंड सेक्स’ के अनुवाद ‘स्त्री उपेक्षिता’ की लेखिका प्रभा जी नहीं रहीं ....
मैंने छिन्नमस्ता और ‘स्त्री उपेक्षिता’ दोनों को पढा है । एमए के बाद मैं स्त्री विमर्श विषयक शोध के सिलसिले मेंकुछ ढूँढ रहा था। तब मैंने ये किताबें पढी.
प्रभा जी का लेखन हमेशा प्रेरणा देता रहेगा ।
महान लेखिका प्रभा जी को विनम्र श्रद्धांजलि।
अचानक एक ख़बर पर नज़र गई ।प्रभा खेतान नहीं रहीं ... ये क्या पीली आंधी, छिन्नमस्ता , सिमोन द बोउवा की पुस्तक ‘दि सेकेंड सेक्स’ के अनुवाद ‘स्त्री उपेक्षिता’ की लेखिका प्रभा जी नहीं रहीं ....
मैंने छिन्नमस्ता और ‘स्त्री उपेक्षिता’ दोनों को पढा है । एमए के बाद मैं स्त्री विमर्श विषयक शोध के सिलसिले मेंकुछ ढूँढ रहा था। तब मैंने ये किताबें पढी.
प्रभा जी का लेखन हमेशा प्रेरणा देता रहेगा ।
महान लेखिका प्रभा जी को विनम्र श्रद्धांजलि।